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Friday, 23 January 2015

নেতাজী সুভাষচন্দ্র কে জানাই প্রনাম


নেতাজী সুভাষ চন্দ্র বোস এবং তার অটোগ্রাফ 
 A newly elect president of the Indian National Congress, Subhas Chandra Bose, arrives at Calcutta's Dum Dum aerodrome after an eventful European tour in 1938




Subhash Chandra Bose as student

Subhash Chandra Bose in his childhood

Subhash Chandra Bose at AICC Meeting 1939

আজ ২৩ জানুয়ারী, সুভাষ জয়ন্তি।  নেতাজী সুভাষচন্দ্র কে জানাই প্রনাম। যার আহ্বানে লক্ষ লক্ষ ভারতবাসী ব্রিটিশ সাম্রাজ্যের বিরুদ্ধে রুলকে দাডিয়ে ছিল বাংলার সেই বীর কে জানাই প্রনাম। " আজ ও স্মরণ হয় তার সেই উদঘোষ "তুমি আমাকে রক্ত দাও আমি তোমাকে স্বাধীনতা দেবো ".  আজ ও স্মরণ হয় জার্মানি থেকে রেডিও ঘোষনা "আমি সুভাষ বলছি". সেই নেতাজী কে জানাই লক্ষ কোটি প্রনাম।

ভারতের দুর্দিনে যে ভাবে নেতাজী ভারত কে বিশ্বমঞ্চে প্রতিষ্ঠিত করেছিলেন সেই কাহিনী অদ্ভুত। জার্মানি তে তখন  হিটলারের নাত্সি বাহিনীর শাসন। তার প্রাতাযে তখন গত ইউরোপ কম্পায়্মান। হিটলার কিন্তু বৃটিশের বিরুদ্ধে ছিল না. সুভাষ জার্মানি গিয়ে তাকে বৃটেনের বিরুদ্ধে যুদ্ধ করতে রাজি করেন। একদিকে হিটলারের জার্মানি অন্যদিকে মুসোলিনির ইতালি এই দুই ইউরোপীয় শক্তির সঙ্গে এশিয়ার শক্তি জুড়ে গেল জাপান। আর এই তিন শক্তি মিলে গেল সুভাষের সঙ্গে।

সমস্ত বিপ্লবীদের শিরোমণি রাসবিহারী বোস সিঙ্গাপুরে গিয়ে গঠন করলেন আজাদ হিন্দ ফৌজ আর তার নেতৃত্ব দিয়ে দিলেন নেতাজীর হাতে। জাপানী সৈন্যের সাহায্যে ব্রিটিশ ভারতের উপর আক্রমণ করলো আজাদ হিন্দ ফৌজ. ভারতের পূর্বোত্তর সীমানায় ইম্ফালে জয় পতাকা।

কি আসামান্য ব্যক্তিত্ব ! প্রেসিডেন্সি কলেজে  পড়ার সময়ে ইংরেজ অধ্যাপকের দ্বারা ভারতীয় দের অপমানের বদলা নিতে নিজের কেরিয়ারের পরোয়া করেন নি. ICS পরীক্ষা উত্তীর্ণ হওয়া সত্বে ও জাতীয়তার রক্ষার জন্যে ছেড়ে দিলেন সেই বিরাট সুযোগ। কোলকাতা শহরের মেয়ার নির্বাচিত হওয়া চাত্তিখানির ব্যাপার নয়. আর মাত্র ৪১ বছর বয়সে সর্ব ভারতীয় কংগ্রেসের সভাপতি!! কিন্তু এত বড় বড় পদ ছাদতে কোনো দিন কোনো দ্বিধা হয় নি.

আসলে নেতাজী কে ডাকছিল দেশ আর দেশের দুস্থ মানুষ। তাই তাদের দুরবস্থা দেখে সদাই তার মান ব্যথিত হয়ে উঠত. তার শরীর ছিল দুর্বল কিন্তু মান ছিল শক্তিশালী।  মৃত্যু তার রহস্যময়। আজ পর্যন্ত জানা যায় নি তিনি জীবিত না মৃত. ১৯৪৫ প্লেন দুর্ঘটনায় তার মৃত্যু কে নিয়ে আজ ও অনেক আশংকা!

ভারত মাতার এই সুযোগ্য সন্তানকে আজ ও সরকার দিতে পারে নি যোগ্য সম্মান কিন্তু সুভাষ আজ ও আমাদের সকালের জীবনের প্রেরনা স্রোত।  সুভাষ বাবু কে জানায় আবার আমাদের শত শত প্রনাম।
Jyoti Kothari
Convener, Jaipur division
Prabhari, West Bengal,

Subhash Bose with his wife






পশ্চিম বঙ্গ যাবে মহারাষ্ট্র হরিয়ানার পথে - জিতবে বিজেপি



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Saturday, 17 January 2015

किरण बेदी बन सकती हैं दिल्ली की मुख्यमंत्री


किरण बेदी जनता को संवोधित करते हुए 

(फोटो: By Leetza T (Own work) [CC BY-SA 4.0 (http://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0)], via Wikimedia Commons)
भारतीय पुलिस सेवा की पूर्व अधिकारी किरण बेदी बन सकती हैं दिल्ली की मुख्यमंत्री! किरण बेदी अपनी स्वच्छ छबि एवं प्रशासनिक दक्षता के लिए जानी जाती हैं. अभी दो दिन पूर्व ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की है. दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एवं केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के समक्ष औपचारिक रूप से उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की.

किरण वेदी नरेंद्र मोदी की प्रशंसक रहीं हैं. भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति के बाद वो सामाजिक सेवा से जुड़ गई थीं एवं लोकपाल आंदोलन में अन्ना हज़ारे की विश्वस्त सहयोगी रहीं। जब अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना का साथ छोड़ अपनी पार्टी बनाई तब भी वे पूरी निष्ठां के साथ अन्ना आंदोलन से जुडी रहीं थी.

किरण बेदी को दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है एवं वे भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर दिल्ली की संभावित मुख्यमंत्री भी हैं. उनके शुरूआती भाषणो में ही उनका ये रूप स्पष्ट झलक रहा है. वे दिल्ली की सभी ७० विधानसभा सीटों को संवोधित करेंगी एवं प्रतिदिन ५-७ सभाएं करेंगी।

अबतक हुए सभी सर्वेक्षणों से स्पष्ट रूप से यह सामने आ रहा है की दिल्ली की जनता का रुझान भाजपा की और है और भाजपा दिल्ली में स्पष्ट बहुमत की सरकार बनाने जा रही है. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखण्ड में चुनाव जीत कर अपनी सरकार बनाई है एवं जम्मू एवं कश्मीर में अबतक की सर्वाधिक सीटें प्राप्त की है.

७ फरबरी को दिल्ली में होनेवाले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा जीत के परचम फहराने जा रही है और सम्भावना है की दिल्ली को किरण बेदी के रूप में एक ईमानदार एवं सक्षम मुख्यमंत्री मिलने जा रहा है. किरण बेदी ने अपने इरादे जाहिर करते हुए दिल्ली को विश्व स्तरीय शहर बनाने का वादा किया है. हम दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनके एवं भारतीय जनता पार्टी की सफलता की शुभकामना करते हैं.

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योजना आयोग बना नीति आयोग

श्रमेव जयते और श्रम कानूनों में सुधार की आवश्यकता

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Sunday, 11 January 2015

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविन्द पानगड़िया को मातृशोक


Arvind Pangaria, vice chairman NITI commission
अरविन्द पानगड़िया, उपाध्यक्ष, नीति आयोग 
नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री अरविन्द पानगड़िया की माताश्री श्रीमती मोहिनीदेवी जी का  दुखद निधन परसों जयपुर में हो गया है. नरेंद्र मोदी विचार मंच इस दुखद अवसर पर हार्दिक शोक संवेदना व्यक्त करता है. स्वर्गीया श्रीमती मोहिनीदेवी जी ९० वर्ष की थीं एवं लम्बे समय से अस्वस्थ्य चल रहीं थीं।  वे राजस्थान के पूर्व वित्त सचिव स्वर्गीय श्री बलूलाल जी पानगड़िया की धर्मपत्नी थीं. आज दिनांक ११ जनवरी रविवार को उनकी तिये की वैठक जयपुर के सुबोध स्कूल में संपन्न हुआ जिसमे राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचन्द  कटारिया, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित अनेक गणमान्य लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। 

अरविन्द जी के भाई पद्मश्री डा.अशोक पानगड़िया जयपुर के जानेमाने न्यूरोलोजिस्ट हैं. वे राजकीय सवाई मानसिंह अस्पताल के अधीक्षक एवं राजस्थान राज्य योजना आयोग (स्वास्थ्य) के सदस्य भी रहे.

अभी कुछ ही दिनों पूर्व योजना आयोग को नीति आयोग के रूप में परिवर्तित किया गया था. अमेरिका के कोलम्बिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक अरविन्द पानगड़िया को नीति आयोग का प्रथम उपाध्यक्ष बनाया गया. यह अत्यंत सन्मानजनक पद है जिसके अध्यक्ष स्वयं भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी हैं.  इस आयोग में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, वित्तमंत्री अरुण जेटली सहित कई काबीना मंत्री एवं सभी राज्यों के मुख्यमंत्री  सदस्य हैं.  

इसके साथ ही अरविन्द पानगड़िया जी को देश के  महामहिम राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा पद्म भूषण सन्मान के लिए भी चुना गया है. उनकी इस उपलब्धि के लिए हम उन्हें वधाई देते हैं और मातृशोक की इस दुखद घडी में उनके प्रति शोक संवेदना व्यक्त करते हैं. ईश्वर से प्रार्थना है की दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोक संतप्त परिवारजनो को धैर्य प्राप्त हो. 


योजना आयोग बना नीति आयोग

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Sunday, 4 January 2015

धर्म, पंथ, धर्मान्तरण एवं कानून


परमात्मा की उपासना करते हुए भक्त  

पूजन सामग्री 
प्रभु पूजा में सन्मिलित साध्वियां 
इन दिनों धर्मान्तरण को लेकर काफी विवाद चल रहा है. लगभग सभी टी वी चैनलों में इस विवाद को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है. इस विवाद को समझने के लिए पहले यह समझना जरूरी है की धर्म क्या है एवं पंथ क्या है?   

वास्तविक धर्म मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाता है एवं उसके चारित्रिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है. यह मनुष्य को गलत आदतों से बचाता है. धर्म सर्वजन हिताय  सर्वजन सुखाय की भावना से ओतप्रोत है. यह मनुष्य को पाप अर्थात गलत कार्यों से बचत है एवं पुण्य अर्थात अच्छी बातों अच्छे कर्मों के लिए प्रेरित करता है. यह मनुष्य में आध्यात्मिकता का वीजारोपण कर उसे चित्त शुद्धि के मार्ग पर ले जाता है. धर्म का अंतिम फल मोक्ष माना गया है जहाँ जीव सर्व विकार रहित होता है.

धर्म का आचरण करते समय उसके विविध पहलु होते हैं  जो की देश, काल परिश्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं परन्तु मुलभुत तत्व नहीं बदलता है. समय समय पर महापुरुषों ने धर्म का स्वयं आचरण करते हुए लोगों को उसी मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है. प्रायः कर इसी से विभिन्न पंथों का उदय हुआ. सभी ऐसे पंथ मूल रूप से उसी धर्म के आचरण की प्रेरणा देते हैं. कालांतर में यहीं पंथ धर्म के रूप में जाना जाने लगते हैं. हर पंथ की अपनि उपासना पद्धति होती है एवं लोग उसी पद्धति से उपासना करते हैं.

यहाँ तक कोई दिक्कत नहीं है परन्तु कभी कभी अपने अपने पंथ की कट्टरता लोगों को उन्मादी बना देती है एवं वे अन्य पंथों से द्वेष करने लगते हैं. यहीं से हिंसा प्रारम्भ होती है. एक पंथ के अनुयायियों को जबरन अपने पंथ में लेन की कुचेष्टा से वातावरण विषाक्त होता है. इसे धर्मान्तरण की संज्ञा दी जाती है परन्तु यह धर्मान्तरण नहीं पथांतरण मात्र है.

मनुष्य अपनी इच्छा से अथवा जन्म से किसी एक पंथ में विश्वास कर उस मार्ग का अनुसरण करता है. कभी कभी वह अन्य पंथ की अच्छी वातों से आकृष्ट हो कर अपना मत बदल कर नए पंथ को स्वीकार करता है इसे धर्मान्तरण का नाम दिया जाता है एवं यह धर्मान्तरण की स्वस्थ्य, स्वच्छ एवं मान्य परंपरा है. इसमें किसी को कोई विरोध नहीं होना चाहिए।

परन्तु किसी को लोभ-लालच दे कर, भय दिखा कर, बरगला कर या जबरदस्ती कर उसका पथांतरण (धर्मान्तरण) करना सभ्य समाज मे स्वीकृत नहीं हो सकता।  अतः धर्मान्तरण पर रोक लगाने वाले कानून लेन के प्रयास की सराहना होनी चाहिए एवं इसे लेन में सभी को सहयोग करना चाहिए. केंद्र सरकार एवं भाजपा ने इस और कदम बढ़ाया है इस पर व्यापक राष्ट्रिय सहमति बन्नी चाहिए।


Jyoti Kothari

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Friday, 2 January 2015

योजना आयोग बना नीति आयोग



नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए योजना आयोग को ख़त्म करते हुए नीति आयोग (NITI- National Institution for Transforming India)  के गठन का कदन उठाया है. मोदी सरकार ने पदभार सँभालते ही इस पर विचार करना प्रारम्भ कर दिया था एवं जनता से भी इस सम्वन्ध में सुझाव मांगे थे.

अनेक पूर्व प्रधान मंत्रियों एवं मुख्य मंत्रियों ने भी समय समय पर योजना आयोग की प्रासंगिकता पर प्रश्न उठाते हुए इसे समाप्त करने की वकालत की थी. मोदी सरकार ने समय की मंग के अनुसार कदम उठते हुये योजना आयोग को समाप्त कर उसके स्थान पर नीति आयोग के गठन का फैसला किया है. नीति आयोग की गवर्निंग काउन्सिल में सभी राज्यों के मुख्य मंत्री / उप-राज्यपाल सम्मिलित होंगे। यह एक थिन्क टैंक  के रूप में काम करेगा।

योजन आयोग में केंद्रीकरण था जब को राज्यों को प्रतिनिधित्व देने के कारन इसका स्वरुप संघीय ढांचे के अनुरूप बना है. यह ज्यादा लोकतान्त्रिक भी है. नीति आयोग विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय का काम कर देश के विकास को सुनिश्चित करेगा।

यह आयोग देश को नेहरू के समाजवादी मॉडल से निकल कर इक्कीसवीं सदी की आकाँक्षाओं के अनुरूप बनाने में मदद करेगा।


Jyoti Kothari

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